अमरावती, 27 अक्टूबर : ‘ARNAB’ चक्रवात के बुधवार को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। इसे देखते हुए राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।
तैयारियों के तहत, 1400 से अधिक गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
काकीनाडा जिले के पिथापुरम इलाके में समुद्र की लहरें तटीय क्षेत्रों तक पहुंच गई हैं। उप्पाडा, कोनापापेट और मूलापेट में लहरों के टकराने से स्थानीय निवासियों में चिंता है।
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) के अनुसार, चक्रवात का असर दिखना शुरू हो गया है। उत्तरी तटीय आंध्र के जिलों में जल्द ही भारी बारिश होने की संभावना है। श्रीकाकुलम जिले में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है, जबकि विशाखापत्तनम और काकीनाडा जैसे तटीय जिलों में तेज हवाएं चलनी शुरू हो गई हैं।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं, राहत शिविरों में जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करें और चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम से कम करें। चक्रवात ‘अरनाब’ के 28 अक्टूबर को बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यनम तटों को पार करने की संभावना है, जिससे उत्तरी तटीय जिलों में भारी बारिश हो सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान पिछले छह घंटों के दौरान 20 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा है। मंगलवार सुबह 8:30 बजे यह पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर केंद्रित था। मौसम विभाग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में मौजूद चक्रवात, जिसे पहले ‘गंभीर चक्रवाती तूफान’ (severe cyclonic storm) माना गया था, अब और अधिक तीव्र होकर ‘अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान’ (very severe cyclonic storm) में बदल गया है। इसके 28 अक्टूबर की सुबह तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के पास आंध्र प्रदेश और यानम के तटों को पार करने की संभावना है।”
IMD के मुताबिक, तट से टकराते समय इस ‘अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान’ में हवा की अधिकतम गति 135 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है, जबकि हवा के झोंकों की गति 150 किमी प्रति घंटा तक पहुँच सकती है।
मुख्यमंत्री ने टेलीकांफ्रेंस के जरिए उन जिलों के कलेक्टर्स से बात की, जहाँ चक्रवात का असर पड़ने की संभावना है। उन्होंने निर्देश दिया कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहे।
जिला कलेक्टर्स को निर्देश दिया कि वे जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाएं और यदि बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तो उसे जल्द से जल्द बहाल करें। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि तेज हवाओं के कारण गिरे पेड़ों और होर्डिंग्स को तुरंत हटा दिया जाए, ताकि यातायात में कोई रुकावट न आए।
अधिकारियों को चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में तैनात नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) के कर्मियों की पूरी मदद लेनी चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टर्स से यह भी कहा कि वे अपने-अपने जिलों में स्थापित कंट्रोल रूम के जरिए ज़मीनी हालात पर लगातार नज़र रखें।
इस बीच, APSDMA के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करने की अपील की है। निवासियों को सलाह दी गई है कि वे चक्रवात के दौरान घर के अंदर ही रहें और तेज हवाओं के बीच बाहर निकलने से बचें। अधिकारियों के निर्देश मिलने पर उन्हें नजदीकी चक्रवात आश्रय स्थलों (साइक्लोन शेल्टर) में चले जाना चाहिए और समुद्र, नदियों तथा तालाबों के पास जाने से बचना चाहिए।





