नई दिल्ली 28 अक्टूबर : Justice Verma Cash Controversy-सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े विवाद पर अपनी राय दी है। यह मामला 12 अगस्त 2025 का है, जब दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन जज, जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से बिना हिसाब-किताब वाली और आंशिक रूप से जली हुई नकदी बरामद हुई थी।
एक आंतरिक जांच के बाद, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सिफारिश भेजी कि उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। जस्टिस यशवंत वर्मा ने 10 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया था।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा करेंगे। समिति की रिपोर्ट 12 अगस्त को मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई थी, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध के कारण इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी।
जस्टिस कौल ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए

हालांकि, जस्टिस संजय किशन कौल का मानना है कि जस्टिस वर्मा से जुड़े आरोपों की जांच का तरीका सही नहीं था। बातचीत में जस्टिस कौल ने कहा, “…मुझे लगा कि जांच ठीक से नहीं हुई, क्योंकि कम से कम आग लगने का कारण तो पता लगाया ही जा सकता था।” उन्होंने आगे कहा, “इस मामले ने मुझे बहुत परेशान किया है, क्योंकि यह एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है जिसकी कानूनी पृष्ठभूमि बहुत अच्छी रही है। इलाहाबाद में कोई शिकायत नहीं थी। दिल्ली में भी कभी कोई शिकायत नहीं रही… मुझे लगा कि जांच ठीक से नहीं हुई… वह कमरा कुछ साल पहले ही बना था, कोई बहुत पुरानी इमारत नहीं थी। ऐसे में आग कैसे लगी .इसमें बहुत सारे सवाल थे, बहुत सारी उलझनें थीं… हां, पैसे मिले हैं, इसलिए कुछ तो ऐसा है जिसका पता लगाया जाना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि उस व्यक्ति की पूरी तरह से बदनामी हो गई है।”
महाभियोग प्रस्ताव का विवरण
पिछले साल, संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर लोकसभा के कुल 145 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसमें कांग्रेस, TDP, JDU, JD(S), जन सेना पार्टी, AGP, शिवसेना (शिंदे), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), SKP और CPI(M) सहित विभिन्न दलों के सांसद शामिल थे।





