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Reading: Book Release : अच्छा लेखन वही जिससे समाज को लाभ मिले : डॉ. रीता बहुगुणा जोशी
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Telescope Times > Blog > Art & Cinema > Book Release : अच्छा लेखन वही जिससे समाज को लाभ मिले : डॉ. रीता बहुगुणा जोशी
Art & Cinema

Book Release : अच्छा लेखन वही जिससे समाज को लाभ मिले : डॉ. रीता बहुगुणा जोशी

The Telescope Times
Last updated: February 17, 2026 10:04 pm
The Telescope Times Published February 17, 2026
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Book Release
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Book Release – जीवन का कोई भी मार्ग सरल नहीं

वाराणसी। Book Release : साहित्य तब सार्थक होता है जब वह समाज के काम आए। अशोका इंस्टीट्यूट के बुद्ध सभागार में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक विजय विनीत की पुस्तक ‘सपनों की पगडंडियां’ के विमोचन अवसर पर देश की जानी-मानी इतिहासकार एवं पूर्व सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने यह बात कही।

उन्होंने कहा, जीवन का कोई भी मार्ग सरल नहीं होता। हर उपलब्धि के पीछे संघर्ष की लंबी यात्रा छिपी होती है। ‘सपनों की पगडंडियां’ केवल जीवनी नहीं, समर्पण की एक गाथा है। प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह कुशवाहा के जीवन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उनमें जिज्ञासा थी, आगे बढ़ने की बेचैनी थी और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का साहस था। यही कारण है कि कठिन राहों पर चलते हुए भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

Book Release – डॉ. जोशी ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय में कुलपति रहते हुए प्रोफेसर कुशवाहा ने शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास किया। क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देना केवल शैक्षणिक निर्णय नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का प्रयास था। कुलपति जैसे उच्च पद पर रहते हुए भी वे छात्रों के बीच जाकर कक्षाएं लेते थे। उन्होंने शिक्षा को प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम माना। उनके प्रयासों से छात्रों में आत्मविश्वास जागा और शिक्षा के प्रति नई चेतना विकसित हुई।

Book Release – उन्होंने यह भी कहा कि बनारस की धरती सदियों से विद्वानों और विचारकों की जन्मस्थली रही है। यहां की मिट्टी में एक विशिष्ट प्रकार की बौद्धिक ऊर्जा है। विजय विनीत ने पुस्तक के माध्यम से दिखाया कि चेतना की यह परंपरा आज भी जीवित है।

नवभारत टाइम्स लखनऊ के संपादक सुधीर मिश्रा ने कहा कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। आने वाले समय में पत्रकारिता किस रूप में होगी, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं है। ऐसे समय में विजय विनीत ने पत्रकारिता और एआई जैसे विषयों पर गंभीर लेखन कर पत्रकारों और पत्रकारिता के विद्यार्थियों को दिशा देने का काम किया है। उन्होंने विजय विनीत की चर्चित कृति ‘मैं इश्क लिखूं तुम बनारस समझना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि स्मृतियों को साहित्य में ढालना साधारण कार्य नहीं है। वर्षों की यादों को कहानी संग्रह में सहेजना लेखक की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

book release : guests were honored

वरिष्ठ लेखक एवं रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने कहा कि विजय विनीत ऐसे लेखक हैं जो किसी चरित्र को उसकी वास्तविकता में प्रस्तुत करने का साहस रखते हैं। धूल-धूसरित जीवन को उसकी संपूर्ण गरिमा के साथ सामने लाना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर मनोज कुमार सिंह ने कहा कि विजय विनीत केवल लेखक नहीं, बल्कि संवेदनशील और निर्भीक पत्रकार हैं। उन्होंने समय-समय पर सत्ता से सवाल किए हैं। बनारस में कोरोना काल का इतिहास उनके बिना अधूरा रहेगा। किसानों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए ‘सपनों की पगडंडियां’ एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के निवर्तमान अध्यक्ष प्रोफेसर नागेंद्र पांडे ने कहा कि विजय विनीत ने अत्यंत स्पष्ट और सादगीपूर्ण भाषा में प्रोफेसर कुशवाहा के व्यक्तित्व को उकेरा है। पुस्तक यह संदेश देती है कि सपनों की पगडंडियां अंततः सपनों के राजमहल तक ले जाती हैं।

वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अभिषेक श्रीवास्तव, वरिष्ठ साहित्यकार रामजी यादव ने कहा कि प्रोफेसर कुशवाहा ने जरूरतमंद छात्रों की भरपूर सहायता की। उनके भीतर मानवीय गुणों की गहराई थी। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. लेनिन रघुवंशी ने कहा कि प्रोफेसर कुशवाहा कई वर्षों तक नोबेल समिति में सलाहकार सदस्य रहे। उन्होंने कभी आडंबर का सहारा नहीं लिया। उनका जीवन प्रेम और सकारात्मक विद्रोह पर आधारित रहा।

कार्यक्रम के दौरान अशोका इंस्टीट्यूट के संस्थापक अशोक कुमार मौर्य को मानवाधिकार जन निगरानी समिति की ओर से ‘जनमित्र अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। सम्मान मानवाधिकार जन निगरानी समिति की ओर से दिया गया।

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