न्यूयॉर्क।DUMP TRUMP : अमेरिका के लोग ट्रम्प के खिलाफ सड़कों पर उतर ए हैं। कई शहरों में ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। यह सब ‘नो किंग्स’ रैलियों के तहत हो रहा है। इनमें पहले भी लाखों की संख्या में लोग शामिल हो चुके हैं। रैलियों में राष्ट्रपति पर महाभियोग लगाने और उन्हें पद से हटाए जाने की मांग की जा रही है। लोगों ने बैनर पकड़ रखे हैं।
आयोजकों का कहना है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लागू की गई नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिनमें ईरान के साथ जंग, सख्त संघीय इमिग्रेशन कानून और बढ़ती महंगाई शामिल हैं। विदेशों में रह रहे अमेरिकी प्रवासी भी विरोध प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए। पेरिस, लंदन और लिस्बन में कई लोग ऐसे पोस्टर थामे दिखाई दिए जिनमें राष्ट्रपति को ‘फासीवादी’ और ‘युद्ध अपराधी’ बताया गया था।
आयोजकों ने कहा, “ट्रंप हम पर एक निरंकुश शासक की तरह राज करना चाहते हैं लेकिन यह अमेरिका है और यहाँ पर सत्ता जनता के हाथों में होती है, न कि उन लोगों या उनके अरबपति साथियों के हाथों में है जो ख़ुद को राजा समझते हैं। “
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने इन विरोध प्रदर्शनों को “ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशन” (ट्रंप-विरोधी मानसिक इलाज) करार दिया और कहा कि “इनकी परवाह सिर्फ़ वे रिपोर्टर करते हैं, जिन्हें यह कवर करने के लिए पैसे मिलते हैं। “
हॉवेल जैसे शहर में भी लोग गुस्से में हैं जहाँ की आबादी सिर्फ़ दस हज़ार के आस-पास है। सेना के कई अफसर भी खफा हैं।
राजनीतिक दुश्मनों पर मुक़दमा
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रशासन के शीर्ष कानून प्रवर्तन अधिकारियों से अपने कथित राजनीतिक दुश्मनों पर मुक़दमा चलाने के लिए भी कहा है।
दूसरी तरफ राष्ट्रपति का कहना है कि संकट में घिरे देश को फिर से बनाने के लिए उनके ये कदम ज़रूरी हैं और उन्होंने उन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है कि वे एक तानाशाह की तरह बर्ताव कर रहे हैं।
उन्होंने इन आरोपों को ‘हिस्टीरिकल’ (बेतुका) बताया है। अक्तूबर में फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “वे मुझे राजा कह रहे हैं। मैं राजा नहीं हूँ। “

लेकिन आलोचकों ने चेतावनी दी है कि उनके प्रशासन के कुछ क़दम असंवैधानिक हैं और अमेरिकी लोकतंत्र के लिए ख़तरा हैं।
न्यूयॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर में भी हज़ारों लोग जमा हुए और मैनहैटन के मिडटाउन इलाक़े से होते हुए मार्च निकाला। यहाँ कई सड़कों को बंद करना पड़ा।
शांतिपूर्वक विरोध, फिर भी नेशनल गॉर्ड तैनात
पूरे दिन, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस सहित अमेरिका के लगभग हर बड़े शहर में प्रदर्शन हुए.
राजधानी वॉशिंगटन डीसी के डाउनटाउन की सड़कों पर पूरे दोपहर रैलियाँ होती रहीं, जिसमें लोगों की भारी भीड़ प्रदर्शन कर रही थी. प्रदर्शनकारियों से लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर कतारें लग गईं और नेशनल मॉल खचाखच भर गया.
अक्तूबर में हुई रैली के बारे में न्यूयॉर्क पुलिस ने बताया कि शहर के सभी पाँचों इलाक़ों में एक लाख से ज़्यादा लोग इकट्ठा हुए थे। इससे पहले की ‘नो किंग्स’ रैली में पूरे देश से लगभग 70 लाख लोग जमा हुए थे। लोग हालाँकि शांतिपूर्वक विरोध कर रहे हैं फिर भी नेशनल गॉर्ड तैनात किए गए हैं।
मालूम हो जनवरी 2025 में व्हाइट हाउस लौटने के बाद से, ट्रंप ने राष्ट्रपति की शक्तियों का दायरा बढ़ा दिया है। वो कई ऐसे फैसले ले चुके जो जनता के गले नहीं उत्तर रहे। इज़राइल के साथ मिल ईरान पर हमला करने पर लोग खफा हैं और कह रहे कि इसकी ज़रूरत नहीं थी।
उन्होंने गवर्नरों की आपत्तियों के बावजूद अमेरिकी शहरों में नेशनल गार्ड के सैनिकों को तैनात किया है। कई और मोर्चों पर भी उनका विरोध हो रहा।





