Kidney Racket – जिस अथॉरिटी ने डॉक्टरों आदि को दोषी पाया उसी की अदालत में गवाही क्यों नहीं
जालंधर। Kidney Racket: किडनी कांड के हाई-प्रोफाइल मामले STATE OF PUNJAB VS JUNAID AHMED KHAN etc. की आज 07 फरवरी को माननीय जज राम पाल की कोर्ट में सुनवाई होगी।
लगभग एक दशक से चल रहे इस किडनी कांड केस में बहुत सी बातें ऐसी हैं जो आम जनता को हैरान और परेशान करती हैं।
अभी कुछ समय पहले इस केस में एक एप्लीकेशन लगाई गई थी कि अगर इस केस के मुख्य आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल के पास किसी भी कोर्ट से रेगुलर बेल मिलने के कागज़ हैं तो माननीय अदालत उस आर्डर की कॉपी दिखाने के आदेश दे, मगर कोई बेल नहीं दिखाई गई। बेल के मामले में कोर्ट के अहलमद का बयान है के उनकी अदालत से कोई भी जमानत नहीं है।

दूसरा सरकारी वकील की तरफ से लगी एक एप्लीकेशन भी बहुत अहम है, जिसमें सरकारी वकील ने लिखा था कि DRME (directorate of research and medical education) की तरफ से बहुत अहम गवाह सौदागर चंद को अदालत में बुलाया जाये। इसे भी अदालत ने नामंजूर कर दिया था। गौरतलब है कि सौदागर चंद शुरू से इस किडनी कांड की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। DRME की तरफ से हुई जांच में ही किडनी कांड में शामिल डॉक्टरों और अन्य को दोषी पाया गया था और उनके नाम किडनी कांड FIR में दर्ज किये गए थे और आरोपी डॉक्टरों का लाइसेंस रद हुआ था। पुलिस की जांच में सौदागर चंद का ब्यान है और वो पुलिस द्वारा पेश किये चलान में भी दर्ज है। फिर भी इस महत्वपूर्ण गवाही का अदालत में न होना न्यायपालिका में विश्वास करने वाले लोगों के मन में कई तरह के संदेह पैदा करता है।

इन दोनों नुक्तों पर कानूनी विशेषजों का कहना है कि ये इस केस की महत्वपूर्ण कड़ियाँ हैं। पुलिस ने एक अहम गवाह को पहले गवाहों की सूची में नहीं डाला, फिर पब्लिक प्रोसिक्यूटर की तरफ से इस एप्लीकेशन में देरी और इस गवाह की गवाही को इन्हीं हवालों से मंजूरी न देना काफी हैरान करता है। जब डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी दफ्तर में इस बात की पुष्टि की गई तो जवाब मिला कि इस गवाह की हाज़री के लिए दुबारा अपील लगाने के लिए सीनियर्स को लिखा गया है।
Kidney Racket – क्या किडनी कांड के मुख्य आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल के पास रेगुलर जमानत है? इस केस में जिस अथॉरिटी ने डॉक्टरों आदि को दोषी पाया उसी की अदालत में गवाही क्यों नहीं? और अगर DRME ने डॉक्टरों को दोषी मानते हुए लाइसेंस रद्द किया तो दुबारा इसी अथॉरिटी ने लाइसेंस कैसे दिया?
मालूम हो अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में पिछले दिनों चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस केस से अलग कर लिया था। वो पिछले एक साल से इस केस की सुनवाई कर रही थीं।
Kidney Racket में जुनैद ब्रोकर था। वो किडनी देने वाले और लगवाने वालों से दलाली करता था।
मालूम हो कि इस केस के आरोपियों में सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉक्टर संजय मित्तल सहित कई और नाम भी हैं।
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