टीवी शो ‘कॉमेडी सर्कस का जादू’ में एक मज़ाक को लेकर विवाद छिड़ने के सोलह साल बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक्टर-होस्ट शेखर सुमन और कॉमेडियन भारती सिंह के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है, जिससे उन्हें लंबे समय बाद राहत मिली है। यह फैसला 1 मई को आया। बता दें कि शेखर सुमन और भारती के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक शब्दों – “या अल्लाह! रसगुल्ला! दही भल्ला!” – के इस्तेमाल को लेकर FIR दर्ज की गई थी।
कोर्ट ने कहा, “किसी कॉमेडी एक्ट में खाने-पीने की चीज़ों का ज़िक्र करना भर किसी धर्म का अपमान नहीं माना जा सकता। इसके लिए कुछ और भी ज़रूरी है। ऐसा कोई सबूत होना चाहिए जिससे यह साबित हो सके कि उन शब्दों को जान-बूझकर किसी को ठेस पहुँचाने के हथियार के तौर पर चुना गया था,”।
इस बीच, अब शेखर सुमन ने कोर्ट के फैसले और 16 साल बाद इस मामले में मिली राहत पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया, “मुझे तो इस बारे में पता भी नहीं था। यह भारती थी जिसने अनजाने में कुछ ऐसा कह दिया था, जिसका कोई धार्मिक मतलब नहीं था। मैं तो इसका हिस्सा भी नहीं था, लेकिन सिर्फ़ पब्लिसिटी पाने के लिए मुझे बेवजह इस मामले में घसीटा गया।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं उस माननीय जज का बेहद शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने इस केस को खारिज कर दिया। यह मेरे लिए एक सुखद आश्चर्य था। मैं तो इस बारे में बहुत पहले ही भूल चुका था। मुझे न तो कोई नोटिस भेजा गया था और न ही मुझे अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट में बुलाया गया था। भगवान का शुक्र है। ज़रा सोचिए कि कुछ लोग कोर्ट का कीमती समय कैसे बर्बाद करते हैं और बेकसूर नागरिकों को परेशान करते हैं। आखिरकार, न्याय की ही जीत होती है।”
यह मामला 2010 का है, जब Sony TV के एक कार्यक्रम में कथित तौर पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ प्रसारित होने के बाद एक शिकायत दर्ज की गई थी। सुमन और सिंह के साथ-साथ, चैनल और एक स्क्रिप्ट राइटर का नाम भी FIR में शामिल था। रज़ा अकादमी के एक प्रतिनिधि द्वारा दर्ज की गई इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भारती ने कुरान की एक आयत का ज़िक्र करते हुए एक मज़ाक किया था, जिसे बाद में उसी एपिसोड के दौरान सुमन ने भी दोहराया था।





