पेरिस। Europe Heatwave से इस गर्मी में 1300 लोगों की मौत की खबर है। लोग सड़कों पर चलने से भी कतरा रहे हैं क्योंकि लुक पिघल कर जूतों और चप्पल में लग रही है। गर्मी की शुरुआत में ही पड़ी भीषण लू (हीटवेव) के कारण बड़ी उम्र के लोग बीमार पड़ रहे हैं, सामान्य से ज़्यादा मौतें हो रही हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया है। सबसे ज्यादा लोग घरों में मर रहे हैं।
रविवार को जर्मनी, चेक रिपब्लिक और पोलैंड समेत महाद्वीप के कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक पहुँच गया, जिससे ट्रांसपोर्ट सेवाएँ प्रभावित हुईं। लोग नदी, झीलों के किनारे बैठ रहे हैं।
वहीं, केवल फ्रांस में लू के कारण 1,000 अतिरिक्त मौतें (सामान्य से ज़्यादा मौतें) दर्ज की गईं। यहाँ कई दिनों तक औसत तापमान 29.8°C (85.6°F) रहा, लेकिन एक शहर में यह 44°C (111.2°F) तक पहुँच गया, जिसके बाद देश के कई इलाकों में तूफ़ान भी आए।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस के अनुसार, 21 जून से अब तक यूरोप में 1,300 अतिरिक्त मौतें हुई हैं। उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा कि यूरोप धरती का सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप है; यहाँ तापमान ग्लोबल औसत से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि महाद्वीप का इंफ्रास्ट्रक्चर इतना मज़बूत नहीं है कि वह इतने ज़्यादा तापमान को झेल सके।
उन्होंने रविवार को कहा, “क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से, कभी कभी आने वाली लू अब लगभग हर साल आ रही है।”





