MARRIAGE NEWS : कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में एक आदमी को 22 साल की शादी के बाद तलाक दे दिया। पति को कोर्ट ने पत्नी को परमानेंट एलिमनी के तौर पर 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि कपल 2004 में अपनी शादी के बाद मुश्किल से एक महीने तक पति-पत्नी की तरह साथ रहा और उसके बाद अलग हो गया।
जस्टिस देबांगसु बसाक और आर्यक दत्त ने माना कि शारीरिक रूप से कमज़ोर होने का कोई सही कारण या सबूत नहीं था। सबूत बताते हैं दोनों मर्जी से अलग रह रहे। दोनों ने बस एक दूसरे पर कमजोरी का इल्ज़ाम लगाया।
5 अक्टूबर के आदेश में लिखा था, “शादी पूरी न होने का कोई सही कारण नहीं है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि कोई भी पार्टी शादी पूरी करने में काबिल नहीं थी। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत बताते हैं कि वे अपनी मर्ज़ी से एक-दूसरे के साथ से अलग हो गए थे।”
पति ने दावा किया कि कपल ने अप्रैल 2004 में शादी की थी, लेकिन कहा जाता है कि उन्होंने कभी शादी पूरी नहीं की, और पत्नी के एक महीने के अंदर घर छोड़ने के बाद वे अलग रहने लगे। बाद में पति ने जुलाई 2016 में क्रूरता और छोड़ने के आधार पर तलाक का केस फाइल किया।
उसने कहा कि उसकी पत्नी ने यह कहते हुए शादी पूरी करने से इनकार कर दिया कि उसे इंटरकोर्स में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि उसका फिगर बेडौल हो जाएगा और उसके बाद कोई उसे नोटिस नहीं करेगा।
आदमी के वकील, एडवोकेट कौशल पॉल ने कहा कि हाई कोर्ट के एक ऑर्डर के बाद एक अंतरिम समय था जिसमें पार्टियों को पति-पत्नी के तौर पर रहना ज़रूरी था। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, कपल कभी साथ नहीं रहा और न ही उस समय के दौरान शादी पूरी हुई। वकील ने आगे कहा कि पति उस समय पत्नी के साथ घर पर नहीं रहता था।
इसके उलट, महिला ने एडवोकेट प्रांतिक घोष के ज़रिए दलील दी कि पति ने उसकी कही गई क्रूरता के बारे में कोई डिटेल नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि पति ने सेक्स न करने की तारीखों की जानकारी नहीं दी थी।
‘कोई आपसी समझौता नहीं’
हाई कोर्ट ने कहा कि यह साबित हो गया है कि शादी पूरी नहीं हुई थी और पत्नी ने अपनी जिरह में माना है कि कपल के बीच कोई साथ नहीं रहा था। इसमें यह भी बताया गया कि कपल को उनके झगड़ों को आपसी सहमति से सुलझाने में मदद करने की कोशिश की गई थी, लेकिन वे इसे सुलझाने के लिए राज़ी नहीं हो सके।
बेंच ने माना कि दोनों वकीलों ने पार्टियों को आपसी सहमति से समझौता करने में मदद करने की पूरी कोशिश की और इस प्रोसेस में अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। बेंच ने पाया कि शादी इतनी टूट गई थी जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था। उसने आगे कहा, “मौजूदा मामले के फैक्ट्स और हालात में जो क्रूरता हुई, वह शादी के अधिकारों से इनकार और शादी न होने से पैदा हुई है।”
कोर्ट ने पति के पास मौजूद एसेट्स पर भी विचार किया और 15 नवंबर, 2026 से चार महीने की किश्तों में 10 लाख रुपये का परमानेंट एलिमनी देना सही समझा। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी अच्छी नौकरी करती है।





