कोरोनरी आर्टरी डिजीज का जल्द पता लगेगा
जालंधर : health news : न्यू रूबी हॉस्पिटल में माकोटो आईवीयूएस-एनआईआरएस इमेजिंग प्रणाली शुरू की गई है। यह अत्याधुनिक तकनीक कोरोनरी धमनी रोग (कोरोनरी आर्टरी डिजीज) का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन के लिए डिज़ाइन की गई है।
यह तकनीक वीवा साइंटिफिक कंपनी ने भारत में लॉन्च की है। प्रणाली का शुभारंभ बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल के डॉ. डी. एस. चड्ढा द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. मनबीर सिंह उपस्थित थे।
इस सिस्टम में दो एडवांस तकनीकें हैं: आईवीयूएस (खून की नली का अल्ट्रासाउंड) और एनआईआरएस (नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी)। इससे दिल की धमनियों की पूरी जांच हो जाती है।
आईवीयूएस उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करके धमनी की दीवारों की विस्तृत क्रॉस-सेक्शनल (आर-पार की) छवियां बनाता है, जिससे हृदय रोग विशेषज्ञ प्लाक का बोझ, वाहिका का आकार और संरचनात्मक असामान्यताओं का अत्यधिक सटीकता से आकलन कर सकते हैं। वहीं, एनआईआरएस धमनी प्लाक की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करता है और वसायुक्त (लिपिड-युक्त) प्लाक का पता लगाने में मदद करता है, जो विशेष रूप से टूटने के खतरे वाले होते हैं।”

आईवीयूएस और एनआईआरएस को एकीकृत करके, माकोटो प्रणाली हृदय रोग विशेषज्ञों को धमनी की संरचना देखने और उच्च जोखिम वाले प्लाक की पहचान करने में सक्षम बनाती है, जो पारंपरिक निदान विधियों के माध्यम से आसानी से नहीं पहचाने जा सकते हैं। ये कमजोर प्लाक अक्सर अचानक दिल के दौरे का मूल कारण होते हैं, यहां तक कि उन रोगियों में भी जिनमें पहले से कोई या बहुत कम लक्षण थे।”
डॉ. मनबीर सिंह ने कहा, कई कारणों से हृदय रोग लगातार बढ़ रहा है, और इलाज को बेहतर बनाने के लिए शीघ्र निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। पारंपरिक जांच विधियाँ हमेशा छिपे हुए जोखिमों का खुलासा नहीं करतीं, और यहीं पर यह तकनीक अंतर लाती है। माकोटो संभावित खतरों को जानलेवा बनने से पहले पहचानने का एक अत्यधिक सटीक और कुशल तरीका प्रदान करता है।





