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Reading: Kidney Racket – APP की अर्जी पर बहस आज, क्यों नहीं होने दी जा रहीं अहम गवाहियां
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Telescope Times > Blog > Crime & Law > Kidney Racket – APP की अर्जी पर बहस आज, क्यों नहीं होने दी जा रहीं अहम गवाहियां
Kidney Racket -
Crime & LawCover Story

Kidney Racket – APP की अर्जी पर बहस आज, क्यों नहीं होने दी जा रहीं अहम गवाहियां

The Telescope Times
Last updated: March 15, 2026 11:56 pm
The Telescope Times Published March 16, 2026
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Kidney Racket Case -डर या रसूख : क्यों गायब हो रहे गवाह और केस छोड़ रहे जज

Kidney Racket – जालंधर। 2015 के हाई प्रोफाइल Kidney Racket में विटनेस विंडो खोलने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने सेशन कोर्ट में जो अपील दायर की थी, उस पर आज यानी कि 16 मार्च 2026 को बहस होनी है। पिछली सुनवाई 21 फरवरी वाले दिन यह अहम अपडेट आया थ। अगर गवाहियां शुरू हो जाती हैं तो आरोपी डॉक्टरों राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और अन्य डॉक्टरों/ प्रबंधकों को तगड़ी परेशानी हो सकती है। सच सामने आ जायेगा और जो भी लोग इस मसले को दबाने में लगे हैं उनको मुँह की खानी पड़ेगी। यह एप्लीकेशन सेक्शन 348 BNSS के तहत स्टेट द्वारा लगाई गई है।

Contents
Kidney Racket Case -डर या रसूख : क्यों गायब हो रहे गवाह और केस छोड़ रहे जजKidney Racket – 11 साल बाद भी सबसे अहम विटनेस सौदागर चंद की गवाही नहीं हुईKidney Racket – दोबारा कैसे मिला ऑर्गन ट्रांसप्लांट का लाइसेंस ?Kidney Racket – DRME पंजाब सरकार की बॉडी, उससे जवाबतलबी हो

Kidney Racket केस को ठंडे बस्ते में डालने की बहुत कोशिश की गई पर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और उनकी टीम को दाद मिलनी चाहिए जिन्होंने सेशन कोर्ट में अपील दायर की कि विटनेस विंडो को ओपन करके गवाहियां करवाईं जाएँ।

मालूम हो केस की विटनेस विंडो को मीनाक्षी गुप्ता चीफ जुडिशियल मेजिस्ट्रेट NRI COURT की तरफ से बंद कर दिया गया था। बाद में उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस केस से खुद को अलग कर लिया था। हालाँकि विशषज्ञों का कहना है कि इस केस में अगर सभी की गवाही हो जाती तो पीड़ितों को न्याय मिल जाता और जनता का विश्वास न्यायिक व्यवस्था में और गहरा हो जाता। ।

Kidney Racket – Court Order

सनद रहे सबसे अहम गवाह DRMEके सुपरिंटेंडेंट सौदागर चंद ने पुलिस को कई पेजों का बयान दिया था जिसमें साफ़ साफ़ लिखा था कि डॉ राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और अन्य डॉक्टरों/ प्रबंधकों को इललीगल किडनी ट्रांसप्लांट में दोषी पाया जाता है। इन्होंने कई किडनी ट्रांसप्लांट बिना NOC लिए किये हैं। इसके चलते नेशनल किडनी हॉस्पिटल के इन डॉक्टरों का लाइसेंस भी रद्द हुआ था। ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण गवाही थी क्योंकि DRME सरकार की एक रेगुलेटरी बॉडी है जो इस तरह के मामलों की जांच करती है और ऑर्गन ट्रांसप्लांट का लाइसेंस देती है। हालाँकि गड़बड़ी का शक DRME पर भी उठ रहा है क्योंकि बाद में इस बॉडी ने आरोपी डॉक्टर को लाइसेंस फिर से दे दिया।

अब आम जनता में चर्चा है कि दशक से जयादा समय बीत जाने के बाद भी केस में अभी तक कई अहम गवाहियां क्यों नहीं हो पाईं हैं। ऐसा क्यों है ? कहाँ से और कैसे सब कुछ मैनेज हो रहा है। आईये कुछ ऐसे नुक्तों / उठते सवालों पर बात करते हैं जो पुलिस प्रशासन, न्यायालय और हेल्थ डिपार्टमेंट की कारगुजारी को शक के घेरे में खड़ा करते हैं।  

Kidney Racket – statement of Saudgar Chand

Kidney Racket – सौदागर चंद ने पुलिस को दिए अपने ब्यान में कहा भी था कि जरूरत पड़ने पर वो अपनी गवाही अदालत में देंगे और इस केस से जुड़े सारे दस्तावेज उनके डिपार्टमेंट के पास मौजूद हैं। ऐसे में उनकी गवाही न होना काफी सवाल खड़े करता है।

Kidney Racket – 11 साल बाद भी सबसे अहम विटनेस सौदागर चंद की गवाही नहीं हुई

पुलिस और कोर्ट से मिले डॉक्यूमेंट के अनुसार, जब 2015 में किडनी कांड का पर्दाफाश हुआ तब कानून के मुताबिक DRME को किडनी कांड से जुड़े डॉक्टरों और हॉस्पिटल की रिपोर्ट बनाने कि लिए कहा गया, और यह भी देखने के लिए कि उक्त रैकेट में शामिल डॉक्टरों ने क्या सभी नियमों का पालन किया है या नहीं ? अगर नहीं किया है तो उनके ऊपर मुकदमा चलाया जाये। इसकी रिपोर्ट / गवाही DRME की तरफ से सुपरिंटेंडेंट सौदागर चंद ने दी।

अब ऐसा क्या है जो आज तक यानी कि 11 साल बीत जाने के बाद भी सौदागर चंद की गवाही नहीं हुई है। यही नहीं इसी लेट लतीफी का फायदा उठा कर आरोपी डॉक्टर सर्वोदय हॉस्पिटल में ट्रांसप्लांट कर रहे हैं। प्रशासन की इस घोर लापरवाही का ही नतीजा है कि पिछले दिनों भी सर्वोदय के बाहर बटाला की एक महिला ने यह कह कर हंगामा खड़ा कर दिया कि उसकी माँ को जबरन किडनी देने के लिए कहा जा रहा था। लोग और मीडिया वाले जमा हो गए जिसमें उस महिला और उसकी माँ ने डॉ राजेश अग्रवाल पर संगीन आरोप लगाये।

Kidney Racket – दोबारा कैसे मिला ऑर्गन ट्रांसप्लांट का लाइसेंस ?

इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि सौदागर चंद का नाम पुलिस चालान में तो था मगर किसी तरह से विटनेस लिस्ट से गायब कर दिया गया या करवा दिया गया। इसी का बहाना बना आज तक इस गवाह को अपनी बात कहने की मंजूरी नहीं मिली। अब अगर इसी डिपार्टमेंट DRME ने दोबारा किडनी रैकेट के आरोपियों को सर्वोदय अस्पताल में ट्रांसप्लांट करने का लाइसेंस दिया है तो ज़ाहिर है कि किसी न किसी नियम का पालन किया होगा। DRME के नियमों में लिखा है कि अगर कोई भी TOHO एक्ट का पालन नहीं करता है तो उसको लाइसेंस नहीं मिलेगा। आरोपी डॉक्टर TOHO एक्ट के तहत दोषी पाए गए थे।

अब जब सारी परतें खुल रहीं हैं तो खुद DRME या इसके अधिकारी या खुद सौदागर चंद भी नहीं चाहते होंगे कि उनकी गवाही हो। ऐसे में यह सच भी लोगों के सामने आना चाहिए कि किडनी कांड में नामजद डॉक्टरों आदि को दोबारा लाइसेंस देते हुए किन रूल्स को फॉलो किया गया ?

Kidney Racket – DRME पंजाब सरकार की बॉडी, उससे जवाबतलबी हो

DRME पंजाब सरकार की बॉडी है। ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि वो अपनी CURRUPTION FREEवाली इमेज को बरकरार रखे और दोषी लोगों पर तुरंत एक्शन ले। सुपरिंटेंडेंट सौदागर चंद को अदालत में बुला कर सच पूछा जाये। सिर्फ सौदागर चंद ही नहीं बल्कि अन्य कई गवाहों को भी इस केस में अपना पक्ष रखने की मंजूरी नहीं दी गई थी। उन सबको अपनी बात कहने का मौका दिया जाये। जनता को बताया जाये कि विटनेस लिस्ट जल्दबाज़ी में बंद क्यों की गई। प्रॉसिक्यूशन इस फैसले के विरोध में या यूँ कहें कि जरूरी गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज करवाने की अर्ज़ियाँ लगा रहा है जिन्हें 2 बार रिजेक्ट कर दिया गया है।

Kidney Racket : विटनेस विंडो खोलने के लिए सेशन कोर्ट में Appeal दायर

https://telescopetimes.com/category/cover-story-news

Kidney Racket

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