Kidney Racket : चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मीनाक्षी गुप्ता ने निजी कारण बता केस छोड़ा
जालंधर। Kidney Racket: शहर के किडनी घोटाले के हाई-प्रोफाइल मामले की फिर से परतें खुलने लगी हैं। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के ताजे मामले में पता चला है कि STATE OF PUNJAB VS JUNAID AHMED KHAN etc.मामले की सुनवाई कर रही चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस केस से अलग कर लिया। अब यह फैसला सचमुच निजी कारणों से लिया है या किसी दबाव में, यह सच्चाई बाहर आनी बाकी है।
Kidney Racket – जुनैद इस केस में ब्रोकर था। वो किडनी देने वाले और लगवाने वालों से दलाली करता था।
केस छोड़ने का फैसला उन्होंने कुछ दिन पहले 22 दिसंबर 2025 को लिया। किडनी कांड की सुनवाई चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता पिछले एक साल से कर रही थीं।
Kidney Racket – अब पुलिस अरेस्ट करेगी या नहीं यह 2 जनवरी को पता चलेगा
मालूम हो कि इस केस में आरोपियों में सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल, दोस्त डॉक्टर संजय मित्तल सहित कई और नाम भी हैं। अगर ये लोग आज के केस में अगर कोर्ट में पेश नहीं होते तो उनकी बेल ख़ारिज हो सकती है। और अगर होते हैं तो उन्हें पुलिस अपने पार्टनर्स डॉक्टरों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने और डॉक्यूमेंट में हेर फेर कर सर्वोदय अस्पताल को घाटे में दिखाने के संगीन आरोपों के तहत केस में गिरफ्तार कर सकती है। अब पुलिस अरेस्ट करेगी या नहीं यह 2 जनवरी को पता चलेगा।
Kidney Racket – चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता ने 22 दिसंबर को केस की सुनवाई की और फिर केस में कोई भी फैसला सुनाने से मना करते हुए कहा कि वो इस समय कुछ निजी कारणों से इस केस पर फैसला नहीं करना चाहतीं।
Kidney Racket- इसलिए, अगली सुनवाई 02.01.2026 को जालंधर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को यह रिक्वेस्ट भेजी जाती है कि इस केस को इस कोर्ट से किसी दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए, जिसके पास सही अधिकार क्षेत्र हो। साथ ही कहा कि आरोपियों को 02.01.2026 को सुबह ठीक 10:00 बजे जालंधर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया जाता है। इसके अलावा अहलमद को निर्देश दिया जाता है कि वह तय तारीख से पहले हर तरह से पूरी फाइल भेज दें।

Kidney Racket – क्या उनपर किसी तरह का बाहरी या आंतरिक दबाव बनाया गया
चर्चा है कि इस केस में कई लोगों का भविष्य दारोमदार पर है तो ऐसे में चलते केस से खुद को अलग कर लेना कई सवाल खड़े करता है। क्या उनपर किसी तरह का बाहरी या आंतरिक दबाव बनाया गया है। अगर ऐसा है तो उन्होंने सोचने में एक साल का समय क्यों लिया।
जानकारी के अनुसार, पिछली पेशी पर आरोपी जुनैद खान, सत्य प्रकाश त्रिवेदी उर्फ आशु त्रिवेदी, मेहरू निसा, प्रदीप कुमार जैन, आयुष कुमार जैन, सुजाता खुराना, मोहिंदर कुमार खुराना, सुदेश कुमारी चावला, चंद्र कौल और गोविंदा कौल की तरफ से पर्सनल पेशी से छूट के लिए एप्लीकेशन फाइल की गई थी जिसे देखते हुए इन आरोपियों को पर्सनल पेशी के लिए माफी दी गई थी।
केस में आरोपी अंकुर अरनेजा बिना किसी सूचना के कोर्ट से गैरहाजिर था तो उसे 02.01.2026 को पेश होने के लिए कहा गया था। राज्य के लिए APP ने बाकी गवाहों को बुलाने के लिए BNSS की धारा 311 Cr.P.C./348 के तहत एक एप्लीकेशन फाइल की। चालान में धारा 28, 31, 32, 42 से 44, 51 से 53, 60 से 64, 69 से 73 और 79 का ज़िक्र है। इसकी कॉपी दे दी गई है। इस एप्लीकेशन का जवाब अगली तारीख यानी कि 2-1-2026पर फाइल किया जाए।
केस में गगनदीप सिंह PS डिवीजन नंबर 7, से पेश हुए थे और उन्होंने आरोपी वर्धन चंद्र का डेथ सर्टिफिकेट रिकॉर्ड पर पेश किया।





