PUNJAB – अंतरराष्ट्रीय सीमा से 300 मीटर की दूरी पर बाड़ लगाने से किसानों को BSF की जाँच से मिलेगी राहत
PUNJAB – पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को कहा कि Centre ने सीमा पर लगी बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा के और करीब ले जाने के कदम उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह कदम उनकी सरकार की बार-बार की मांगों के बाद उठाया गया है और इससे सीमावर्ती इलाकों में किसानों को लंबे समय से आ रही मुश्किलों में राहत मिल सकती है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सीमावर्ती जिलों—जिनमें पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर शामिल हैं—के उपायुक्तों (Deputy Commissioners) को निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के तहत उन्हें सर्वेक्षण करके यह पता लगाना है कि क्या बाड़ को भारत-पाकिस्तान सीमा के और करीब ले जाना संभव है।
PUNJAB – मान ने बताया कि बाड़ की मौजूदा स्थिति ऐसी है कि कई जगहों पर यह भारतीय सीमा के अंदर लगभग 3-4 किलोमीटर पीछे लगी हुई है। इसके चलते खेती की बहुत सारी ज़मीन बाड़ के दूसरी तरफ रह गई है। उन्होंने कहा कि किसानों को इन खेतों में जाने की इजाज़त केवल तय समय—आमतौर पर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक—के बीच ही मिलती है। इस दौरान भी उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) की निगरानी में रहना पड़ता है और नियमित जांच से गुज़रना पड़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि बाड़ को प्रस्तावित तरीके से आगे खिसकाने से लाखों एकड़ ज़मीन वापस बाड़ वाले सुरक्षित क्षेत्र के अंदर आ जाएगी। इससे किसानों को खेती करने में ज़्यादा आज़ादी मिलेगी और वे बिना किसी समय की पाबंदी या बार-बार होने वाली सुरक्षा जांच की परेशानी के अपनी पसंद की फसलें उगा सकेंगे।
PUNJAB – मान ने कहा, “किसानों को अपनी ही ज़मीन तक पहुंचने के लिए रोज़ाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हमने केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे को लगातार उठाया है।” उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने इस मामले में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उप-मंडल मजिस्ट्रेटों (Sub-Divisional Magistrates) को ज़मीनी सर्वेक्षण करने का काम सौंपा गया है। उन्हें ऐसे इलाकों की पहचान करनी है, जहां सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 300 मीटर की दूरी पर फिर से लगाया जा सके।
हालांकि मान ने इस घटनाक्रम को सीमावर्ती किसानों के लिए “बड़ी राहत” बताया, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि यह प्रक्रिया अभी सर्वेक्षण के चरण में है। बाड़ को असल में कब तक लगाया जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सर्वेक्षण में क्या नतीजे आते हैं और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर क्या फैसला लिया जाता है।
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