SOCIAL MEDIA ALERT
नई दिल्ली। SOCIAL MEDIA ALERT : भारत सहित बहुत से देशों में लोग गलत ID प्रूफ लगा कर न केवल फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और डेटिंग-गेमिंग ऐप्स इस्तेमाल कर रहे हैं बल्कि ऍप्स का मिसयूज भी कर रहे हैं। फर्जी पहचान के साथ अब सोशल मीडिया पर रहना कठिन हो जायेगा। संसद की एक समिति ने यह सिफारिश की है कि बिना ID प्रूफ अकाउंट बनाना मुमकिन नहीं होगा। KYC (Know Your Customer) यानी पहचान सत्यापन को अनिवार्य करने की भी सिफारिश की गई है।
अब अगर संसदीय समिति की सरकार को भेजी गईं यह बेहद सख्त सिफारिशें मंजूर हो जाती हैं तो इंटरनेट की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है। ये सुझाव महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संसदीय समिति (2025-26) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दी है कि देश के सभी सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर KYC ज़रूरी कर दिया जाये।
समिति का मानना है कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए ‘असली पहचान’ का होना जरूरी है। वर्तमान में जो समस्याएं सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं, वे हैं: फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी: फेक आईडी बनाकर लोगों को ठगना और बदनाम करना। ऑनलाइन उत्पीड़न में महिलाओं और बच्चों को गुमनाम रहकर निशाना बनाया जा रहा है। लोग डीपफेक और भ्रामक जानकारी एआई (AI) के जरिए लेकर गलत कंटेंट फैला रहे हैं।
KYC वेरिफिकेशन लागू होने से सभी अकाउंट्स असली पहचान से जुड़ जाएंगे। इससे लोग इंटरनेट पर ज्यादा जिम्मेदारी से बर्ताव करेंगे और डिजिटल फ्रॉड को ट्रैक करना आसान हो जाएगा।
नए प्रस्ताव में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार को सख्त एज-वेरिफिकेशन बनाने का सुझाव दिया गया है। समिति का मानना है कि कड़े नियमों से बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद आपत्तिजनक और नुकसानदायक कंटेंट से दूर रखा जा सकेगा।
समिति ने यह भी प्रस्तावित किया है कि जिन अकाउंट्स को लेकर बार-बार शिकायतें या रिपोर्ट मिलती हैं, उनकी कड़ी निगरानी की जानी चाहिए।
हालांकि सुरक्षा के नजरिए से ये कदम प्रभावशाली हैं, लेकिन इनके साथ प्राइवेसी से जुड़े कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी चिंता डेटा लीक और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर है। क्योंकि सोशल मीडिया कंपनियों के पास यूजर्स की निजी जानकारी और सरकारी आईडी का एक्सेस होने से डेटा की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी संवेदनशील जानकारी साझा करने से यूजर्स डेटा ब्रीच जैसी समस्याओं के प्रति और भी अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसके अलावा, एक व्यावहारिक चुनौती ये भी है कि यह व्यवस्था सोशल मीडिया को सबकी पहुंच से दूर कर सकती है। भारत में आज भी कई ऐसे लोग हैं जिनके पास आधिकारिक सरकारी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अनिवार्य केवाईसी (KYC) नियम उन लोगों के लिए इंटरनेट और एप्स के इस्तेमाल के रास्ते बंद कर सकता है, जो डिजिटल दुनिया का हिस्सा तो हैं लेकिन जिनके पास कागजी पहचान की कमी है।





