Kidney Racket : पूछने पर पुलिस ने कहा, SIT बना दी है इसलिए
जालंधर। Kidney Racket: किडनी कांड के हाई-प्रोफाइल मामले STATE OF PUNJAB VS JUNAID AHMED KHAN etc. की आज कोर्ट में सुनवाई हुई। आज के दिन की सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि सर्वोदय अस्पताल के डॉ राजेश अग्रवाल और डॉक्टर संजय मित्तल खुलेआम घूमते नज़र आये, जबकि वो हाल ही हुई एक FIR में नामजद हैं जिसमें इन दोनों आरोपियों की संगीन धाराओं के अधीन गिरफ्तारी पेंडिंग है। वो किडनी कांड के केस में हस्ताक्षर करके चले भी गए और बाहर पुलिस का जमावड़ा बना रहा।
मालूम हो कि पुलिस ने उक्त दोनों डॉक्टरों पर अपने पार्टनर्स डॉक्टरों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने और डॉक्यूमेंट में हेर फेर कर सर्वोदय अस्पताल को घाटे में दिखाने के संगीन आरोपों के तहत केस दर्ज कर रखा है जिसमें अभी गिरफ्तारी की जानी बाकी है।
Kidney Racket : सूत्रों के अनुसार, जब बारादरी पुलिस से बात की गई तो पता चला कि उनकी गिरफ्तारी इसलिए नहीं की गई क्योंकि SIT बना दी गई है जो अब यह मामला देखेगी।
इससे पहले उक्त ठगी वाले मामले में पुलिस यही कहती आ रही थी कि इन्वेस्टीगेशन चल रही है। किसी को नहीं पता कि उक्त आरोपी कहाँ हैं और इस मामले में शामिल अन्य डॉक्टर कहां हैं। मालूम हो कि इस मामले में सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल और डॉक्टर संजय मित्तल सहित कई और नाम भी हैं।
Kidney Racket : कोई सूचना कोर्ट रूम के बाहर नोटिस बोर्ड पर नहीं
जानकारी के अनुसार, किडनी कांड मामले में एक एप्लीकेशन लगाई गई थी कि डॉ राजेश अग्रवाल और डॉक्टर संजय मित्तल हाल ही में हुई 420 वाली FIR में नामजद हैं और फरार हैं। इसलिए इनकी गिरफ्तारी की जाये, मगर इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक बात और इस किडनी कांड मामले की आज सुनवाई है इस बाबत भी कोई सूचना नोटिस बोर्ड पर नहीं लगाई गई थी। जब इस बारे कोर्ट कर्मचारी से पूछा गया तो जवाब मिला कि उन्हें सुबह ही इस केस बारे पता चला है इसलिए सूची में केस का नाम नहीं था।

Kidney Racket : कई सवाल और संदेह
इस सारे मसले को ध्यान से जोड़ें तो समझ आता है कि कोई न कोई दबाव काम ज़रूर कर रहा है जिसके रहते इस किडनी कांड और फर्ज़ीवाड़े वाले केस में नामजद आरोपियों को बहुत से ग्रेस-मार्क्स मिल रहे हैं और इन केस की डिटेल्स को जनता के सामने नहीं रखा जा रहा।
कानूनी एक्सपर्ट्स का मानना है कि एप्लीकेशन पर एक्शन लिया जा सकता था। थाने को सूचित किया जा सकता था।
किडनी घोटाले के स्टेट बनाम जुनैद अहमद केस को एक दिन पहले CJM सुशील बोध ने वकीलों के बीच बहस के बाद जज राम पाल की कोर्ट में ट्रांसफर किया था। मालूम हो कि पिछले दिनों चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस केस से अलग कर लिया। था। वो पिछले एक साल से इस केस की सुनवाई कर रही थीं।
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