जालंधर: IMMIGRATION FRAUD: वासल मॉल में अराध्या इंटरप्राइजेज इमिग्रेशन कार्यालय पर विदेश भेजने के नाम पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दुबई से लौटे नीरज कुमार नामक युवक ने आरोप लगाया है कि कंसल्टेंसी के माध्यम से वर्क परमिट/वीजा पर विदेश भेजे गए युवाओं को वहां पहुंचने के बाद परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अराध्या इंटप्राइजिज के पीड़ित क्लाइंट ने खुलासा किया है यह जितने भी लोगों को वर्क परमिट पर दुबई भेजते हैं, उनकी नौकरियां सिर्फ पाकिस्तानी लोगों के यहां ही लगवाई जाती हैं और वह पाकिस्तानी भारतीयों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करते हैं।
उसने आरोप लगाया, अराध्या इंटरप्राइजिज के पास कंसल्टैंसी का लाइसैंस है, लेकिन उसके बावजूद यह एजैंट लोगों को गलत तरीके से विदेश भेजने का काम कर रहा है।
नीरज का दावा है कि उसके साथ भी दुबई में नौकरी, वेतन और रहने-खाने को लेकर गंभीर समस्याएं हुईं।
नीरज के मुताबिक, उसने दुबई जाने के लिए अराध्या इंटरप्राइजेज के मालिक से संपर्क किया था। उसे करीब 90 हजार रुपये में विजिट-टू-वर्क वीजा दिलाने की बात कही गई। लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उसको असलियत पता चली।
नीरज ने बताया कि एयरपोर्ट पर उसे एक पाकिस्तानी एजेंट मिला, जिसने उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे मुर्गीखाने में ले जाया गया जहां उसने रात गुजारी। बाद में उसे एक पाकिस्तानी व्यक्ति की वर्कशॉप में काम दिलाया गया। नीरज का आरोप है कि वहां उसे न तो पर्याप्त खाना दिया गया और न ही काम के बदले वेतन मिला।
विरोध करने पर एजेंट ने उसकी नौकरी बदल दी और उसे दूसरी जगह काम पर लगा दिया। नीरज का कहना है कि उसने वहां भी करीब दो महीने काम किया, लेकिन उसे वेतन नहीं मिला। इसके बाद जब उसने भारत वापस भेजने की मांग की तो उसे कथित तौर पर दुबई के एक ऐसे इलाके में ले जाया गया जहां पहले से पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कई युवक-युवतियां फंसे हुए थे।
जानकारों की मदद से किसी तरह भारत लौट आया
नीरज के मुताबिक, वहां मौजूद लोगों की हालत भी बेहद खराब थी। बाद में उसे एक कॉल सेंटर में नौकरी दिलाई गई, लेकिन कुछ समय काम करने के बाद उसे पता चला कि वहां कथित तौर पर फर्जी जुए और लोगों से ठगी से जुड़ा काम किया जा रहा था। किसी कानूनी पचड़े में फंसने के डर से उसने वहां काम छोड़ दिया और अपने जानकारों की मदद से किसी तरह भारत लौट आया।
नीरज ने आरोप लगाया कि विदेश भेजने वाली कुछ कंसल्टेंसियां युवाओं को नौकरी और बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर विदेश भेज देती हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें एजेंटों के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
भारत लौटने के बाद नीरज ने जालंधर पुलिस को शिकायत दी। उसके अनुसार, बाद में एजेंट ने उसके द्वारा दिए गए पैसे वापस कर दिए और दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हालांकि, नीरज का कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर मामला सुलझ जाने के बावजूद ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए।
नीरज ने पंजाब सरकार और भारत सरकार से मांग की है कि विदेश भेजने वाली कंसल्टेंसियों के लाइसेंस और उनके माध्यम से विदेश भेजे जा रहे युवाओं की नौकरी व नियोक्ता संबंधी जानकारी की जांच की जाए।
कंपनी के सोशल मीडिया अकाउंट पर जाकर देखा गया तो पता चला कि कंपनी अपने ऑफिस के होर्डिंग बोर्डिंग द्वारा भी गलत इनफार्मेशन दे रही है। सोशल मीडिया पर भी दिख रहे बोर्ड पर लिखा गया है कि वो STUDY VISA, PR के लिए भी डील करते हैं जबकि कंपनी सिर्फ कंसल्टेंसी के लिए है।
मालूम हो कि ऐसी कंपनियों को एक सेल्फ डेक्लरेशन फॉर्म भरना होता है जिसमें ये लिख कर देते हैं कि किस भी प्रकार के प्रिंट मेटेरियल से यह लोगों को भर्मित नहीं करेंगे।
हालाँकि कंपनी का पक्ष जानने के लिए जब 075086 05288 कॉल किया तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया।





