कोर्ट के आदेश के बाद रामा मंडी थाने में FIR दर्ज
जालंधर। पत्रकार नीरज जिंदल को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां देने, अदालत में गवाही देने से रोकने और दबाव बनाने के आरोप में जालंधर के थाना रामा मंडी में प्रिंस लाहौरिया उर्फ सरबजीत सिंह और मीता लाहौरिया के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMIC) जालंधर राम पाल के आदेश के बाद हुई।
जानकारी के अनुसार नीरज जिंदल की तरफ से advocate मनित मल्होत्रा कोर्ट में पेश हुए और याचिका में कहा था कि नीरज जिंदल सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, नशा तस्करी और गैंगस्टर गतिविधियों से संबंधित समाचार प्रकाशित करते हैं। गैंगस्टरों और नशा तस्करों के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने के कारण उन्हें कई बार निशाना बनाया गया।

FIR – याचिका में कहा गया कि प्रिंस लाहौरिया और मीता लाहौरिया द्वारा उन्हें बार-बार धमकियां दी गईं। आरोप है कि उनके घर और कार्यालय पर कई बार हमला किया गया, ईंट-पत्थर फेंके गए, मोबाइल फोन छीनने की कोशिश की गई तथा उन्हें गोली मारने की धमकियां भी दी गईं। पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि इन घटनाओं के संबंध में पहले से दर्ज मामलों में वह गवाह हैं और अदालत में गवाही न देने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
अदालत के समक्ष यह भी तथ्य रखा गया कि पत्रकार द्वारा पुलिस अधिकारियों को कई शिकायतें देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता के आरोप प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 232 के अंतर्गत अपराध का मामला बनाते हैं। यह धारा किसी व्यक्ति को गवाही देने से रोकने या झूठी गवाही दिलाने के उद्देश्य से धमकाने से संबंधित है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसके बाद अदालत ने थाना रामा मंडी को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
अदालती आदेश के अनुपालन में थाना रामा मंडी में प्रिंस लाहौरिया उर्फ सरबजीत सिंह और मीता लाहौरिया के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। आदेश की प्रति में यह भी उल्लेख है कि जांच के लिए पुलिस अधिकारी नियुक्त किया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
गौरतलब है कि नीरज जिंदल पर कथित हमलों से जुड़े कई पुराने मामले पहले से अदालत में विचाराधीन हैं। पत्रकार का आरोप है कि उन्हीं मामलों में गवाही को प्रभावित करने के लिए यह धमकियां दी जा रही थीं। अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की विस्तृत जांच करेगी।
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