Kidney Racket – जिस दिन की जमानत की बात डॉ राजेश अग्रवाल करते हैं उस दिन कोई बेल नहीं
Sarvodaya Fraud case – पुलिस आरोपी डॉक्टर को अरेस्ट न करने की ठोस वजह बताए – Court
जालंधर। हाई प्रोफाइल किडनी कांड में नामजद मुख्य आरोपी डॉ. राजेश अग्रवाल और अन्य आरोपियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दूसरी तरफ सर्वोदय अस्पताल में ठगी के केस में भी अहम मोड़ आया है। दोनों केसों में माननीय अदालत ने अगली सुनवाई 21 फरवरी को तय की है। इससे डॉ अग्रवाल और पुलिस विभाग दोनों ही परेशानी में आ गए हैं।
दोनों केसों के लिए अगली सुनवाई बहुत महत्वपूर्ण है। इन पर शिकायत कर्ता, प्रॉसिक्यूशन, वकीलों का तो पूरा ध्यान है ही, आम लोग भी नज़र गड़ाए बैठे हैं कि माननीय कोर्ट का एक्शन क्या होगा। हर तरफ चर्चाएं तेज़ हैं कि क्या डॉ. राजेश अग्रवाल और अन्य आरोपी डॉक्टरों की गिरफ्तारी होगी ? क्योंकि किडनी कांड में डॉ. राजेश अग्रवाल की हाज़री जरूरी है और धोखाधड़ी केस में लगी अरेस्ट की एप्लीकेशन की सुनवाई भी इसी दिन है। इस मामले में पिछली सुनवाई पर अदालत ने पुलिस की SIT बनाने वाले नुक्ते को एक तरफ रखते हुए सख्त लहजे में कहा था कि पुलिस आरोपी डॉक्टर को अरेस्ट न करने की ठोस वजह बताए।
क्यों महत्वपूर्ण है अगली सुनवाई ?
मामले की छानबीन और कागज़ात पर नज़र डालें तो पता चलता है कि Kidney Racket मामले में पहले एक बहुत महत्वपूर्ण गवाही को मंजूरी नहीं दी गई थी। ये गवाही थी DRME की तरफ से सौदागर चंद की, जिनकी रिपोर्ट के बाद ही किडनी कांड में डॉ राजेश और अन्य डॉक्टरों को दोषी पाया गया था कि वे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट में शामिल हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका लाइसेंस रद्द हुआ था।
ये गवाही अदालत में पेश किये गए चालान में तो थी, मगर किसी तरह सौदागर चंद का नाम विटनेस लिस्ट से गायब हो गया
जिसपर आपत्ति जताते होते प्रॉसिक्यूशन ने एप्लीकेशन लगाई थी कि उसकी गवाही करवाई जाये। इस अर्ज़ी को माननीय अदालत ने पिछले एक आर्डर का हवाला देते हुए मंजूरी नहीं दी थी। अब पिछली सुनवाई में प्रॉसिक्यूशन ने फिर से अपना जवाब दाखिल किया है कि वो सौदागर चंद की गवाही करवाने के लिए सेशन कोर्ट में अपील लगाएंगे। इस किडनी कांड वाले वाले मामले की सुनवाई 21 को है, जिसमें आरोपियों की हाज़री जरूरी है।

गौरतलब है कि Kidney Racket मामले में भी यह एप्लीकेशन लग चुकी है कि अगर डॉक्टर राजेश अग्रवाल के पास किसी भी अदालत में मंजूर हुई रेगुलर बेल है तो उसे दिखाया जाये। कोर्ट के अहलमद ने भी लिखित में कह दिया था कि जिस दिन की जमानत की बात डॉ राजेश अग्रवाल करते हैं उस दिन कोई बेल नहीं दी गई।

दूसरी तरफ सर्वोदय धोखाधड़ी मामले में अदालत के कहने पर FIR तो हुई मगर इनमें आरोपियों की अरेस्ट अभी तक लंबित है। गिरफ्तारी में देरी के चलते शिकायतकर्ता ने पहले अरेस्ट की एप्लीकेशन लगाई थी। इस पर पुलिस ने जवाब दिया कि SIT बन चुकी है जो जाँच कर रही है। पुलिस के इस जवाब को एक तरफ करते हुए अदालत ने जवाब तलब किया है कि गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और अगर जरूरी नहीं तो क्यों नहीं है ? पुलिस को इस बार इसकी ठोस वजह बताने को कहा गया है।
मामले के एक्सपर्ट की मानें तो पुलिस को ठगी वाले केस में कोई न कोई एक्शन लेना होगा या लिखित में गिरफ्तार न करने का तर्क देना होगा क्योंकि डॉ राजेश अग्रवाल और अन्य आरोपी Kidney Racket मामले में सुनवाई के चलते कोर्ट में मौजूद होंगे।
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