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Telescope Times > Blog > Crime & Law > KIDNEY RACKET JALANDHAR : PUNJAB GOVT से सवाल- जब DRME ने लाइसेंस कैंसिल किया तो दोबारा कैसे दिया
KIDNEY RACKET JALANDHAR : पंजाब सरकार से सवाल- जब DRME ने लाइसेंस कैंसिल किया तो दोबारा कैसे दिया
Crime & Law

KIDNEY RACKET JALANDHAR : PUNJAB GOVT से सवाल- जब DRME ने लाइसेंस कैंसिल किया तो दोबारा कैसे दिया

The Telescope Times
Last updated: April 14, 2026 11:52 pm
The Telescope Times Published April 9, 2026
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KIDNEY RACKET JALANDHAR : पंजाब सरकार से सवाल- जब DRME ने लाइसेंस कैंसिल किया तो दोबारा कैसे दिया
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जालंधर। KIDNEY RACKET 2015 में नित नए डेवलपमेंट के कारण दोबारा से यह केस चर्चा का विषय बन गया है। इस केस में मुख्य आरोपी सर्वोदय अस्पताल के डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ संजय मित्तल और अन्य डॉक्टर / प्रबंधक हैं। इन पर बिना मंजूरी लिए अवैध तरीके से 7 किडनी ट्रांसप्लांट करने का केस चल रहा है।

APP ने कोर्ट से प्रार्थना की

State vs Junaid केस में ताजी खबर यह है कि पिछली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को जज रामपाल की कोर्ट में हुई। इसमें सरकार की तरफ से पेश हुए APP ने बताया कि उन्होंने विटनेस विंडो खोले की एप्लीकेशन पहले से लगा रखी है जिसपर फैसला पेंडिंग है। विटनेस विंडो की अर्जी पर सुनवाई 14 अप्रैल 2026 को तय हुई है। सुनवाई के दौरान APP ने कोर्ट से प्रार्थना की कि यह केस पहले ही बहुत लंबा खिंच गया है तो सुनवाई की तारीख नजदीक वाली ही रखी जाएँ। कोर्ट ने सहमति जताते हुए किडनी कांड की सुनवाई 20 अप्रैल रख दी।

प्रिंसिपल सेक्रेटरी K RAHUL ने नहीं लिया कोई एक्शन

यहाँ सबसे अहम बात यह है कि इस बाबत जब चीफ सेक्रेटरी KAP SINHA को लिखित में बताया गया तो उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी K RAHUL को तुरंत एक्शन लेने को कहा पर उनके कान पर भी जूं नहीं रेंगी।

मालूम हो इस केस पर आम जनता, इसके पीड़ित, पुलिस विभाग, अधिवक्ता, जज और खास करके डॉक्टरों की खासी नज़र है। केस की सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस के पास DRME (Directorate of Research and Medical Education, Punjab), जो सरकार का अंग है और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए AUTHORISED COMMITTEE बनाता है, उसी के सुपरिंटेंडेंट सौदागर चंद का लिखित बयान है कि इस डॉक्टर राजेश अग्रवाल और अन्य ने नेशनल किडनी अस्पताल में रहते हुए बिना मंजूरी किडनी बदलीं। इसमें कौन कौन लोग शामिल थे और कैसे इस पूरे कांड को अंजाम दिया गया ये सब उसने विस्तार से बताया है। इसके बाद डॉक्टर का लाइसेंस कैंसल हो गया। बाद में किन आधार पर इसे दोबारा दिया गया, यह कड़ी अनसुलझी है।

सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि पूरे प्रकरण में TOHO ACT की उल्लंघना की गई। उसने लिखित में यह भी कहा कि इस सम्बन्धी सारा रिकॉर्ड उनके पास है और जब भी ज़रूरत होगी वो कोर्ट में पेश कर देंगे।

लोगों की पंजाब सरकार से मांग है कि वो डॉक्यूमेंट सार्वजनिक किए जाएँ जिनके आधार पर इतने बड़े आरोपों का सामना कर रहे डॉक्टर को दोबारा ट्रांसप्लांट की मंजूरी दी गई क्योंकि अगर DRME के नियम देखें तो साफ़ लिखा है कि अगर आप किसी तरह के आपराधिक केस का सामना कर रहे हैं तो लाइसेंस दोबारा नहीं मिलेगा।

याद रहे इससे पहले इस केस की विटनेस विंडो को जज मीनाक्षी गुप्ता की तरफ से बंद कर दिया गया था। बाद में उन्होंने निजी कारणों का हवाला दे खुद को इस केस से अलग कर लिया था। उधर क़ानूनी जानकारों का कहना है कि सारा सच सामने आ जाता अगर इस केस में सभी की गवाही हो जाती।

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TAGGED:Directorate of Research and Medical EducationDR RAJESH AGGARWALDRMEKIDNEY RACKET JALANDHAR
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