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Reading: New Rules For UPI 15 अक्टूबर से लागू, 2000 लेन-देन पर लगेंगे 5 रुपए
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New Rules For UPI 15 अक्टूबर से लागू, 2000 लेन-देन पर लगेंगे 5 रुपए
Business Affairs

New Rules For UPI 15 अक्टूबर से लागू, 2000 लेन-देन पर लगेंगे 5 रुपए

The Telescope Times
Last updated: September 18, 2026 10:51 am
The Telescope Times Published September 15, 2026
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New Rules For UPI 15 अक्टूबर से लागू, 2000 लेन-देन पर लगेंगे 5 रुपए
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  1. जालंधर/नई दिल्ली। New Rules For UPI : अगर आप भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए गूगल पे, फोनपे या पेटीएम जैसे यूपीआई (UPI) ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। केंद्र सरकार केंद्र सरकार नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और ने UPI लेनदेन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ढांचा जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो जायेगा। आम जनता के लिए यूपीआई पहले की तरह फ्री ही रहेगा। समझें नए नियमों से किसे छूट मिलेगी और किस पर चार्ज लगेगा।
  2. PERSON TO PERSON UPI पेमेंट पर कोई चार्ज देना
    आम जनता के लिए यूपीआई सेवा हमेशा की तरह 100% फ्री रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी यूपीआई ऐप या बैंक ग्राहकों से कोई हिडन चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस या अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकता। इसके अलावा, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले सभी ट्रांसफर (चाहे वह ₹10 हो या ₹1 लाख) पूरी तरह से फ्री रहेंगे।
  3. नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नियम इन पर
    यह नया चार्ज केवल व्यावसायिक लेनदेन (व्यक्ति से मर्चेंट / P2M) पर लागू होगा, वह भी केवल तब जब लेनदेन की राशि ₹2000 से ज्यादा होगी, जबकि इससे नीचे के सभी प्रकार के मर्चेंट पेमेंट्स पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
  4. ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट पर ₹5 फ्लैट चार्ज
    ₹2,000 से ज्यादा के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% का मामूली MDR लागू होगा। हालांकि, ₹75,000 या उससे ज्यादा के बड़े पेमेंट्स पर यह चार्ज अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। वहीं, रेलवे, फ्यूल, टेलीकॉम, बीमा और कृषि इनपुट जैसे जरूरी और पब्लिक सेक्टर में ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर केवल ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर और सिक्योरिटीज पेमेंट्स पर मात्र 0.02% का चार्ज (अधिकतम ₹300) लागू होगा।
  5. छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों पर असर
    छोटे व्यापारियों को इस नियम से पूरी राहत दी गई है। जिन छोटे मर्चेंट्स (P2PM श्रेणी) की क्यूआर (QR) कोड के जरिए महीने की कमाई ₹1 लाख तक है, उनसे किसी भी लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।

5 MDR चार्ज ग्राहकों से नहीं
बैंकों और एनपीसीआई को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि व्यापारी या दुकानदार इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। यह चार्ज मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम पार्टनर्स (जैसे बैंक और ऐप ऑपरेटर्स) के बीच का कमर्शियल मामला है।

  1. MDR का दुकानदारों और मर्चेंट्स पर असर
    डेटा विश्लेषण के अनुसार, इस नए नियम से केवल 4 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शंस ही प्रभावित होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश में होने वाले अधिकतर मर्चेंट पेमेंट्स या तो ₹2000 की सीमा से कम के होते हैं या फिर छोटे वेंडर्स के तहत आते हैं। इससे छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर कोई अतिरिक्त खर्च का बोझ नहीं पड़ेगा।
  2. फ्री UPI पेमेंट्स की कोई लिमिट नहीं
    आम नागरिकों के लिए फ्री यूपीआई ट्रांजैक्शंस की कोई मंथली कोटा, वॉल्यूम लिमिट या टायर्ड कैप (सीमा) नहीं रखी गई है। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच किए जाने वाले पेमेंट्स पर अनलिमिटेड फ्री इस्तेमाल की सुविधा जारी रहेगी।
  3. ₹1 से ₹5 लाख तक की डेली UPI लिमिट का अर्थ
    बैंकों और एनपीसीआई (NPCI) द्वारा तय की गई ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की दैनिक लेन-देन सीमाएं पूरी तरह से सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन के उपाय हैं। इनका कमर्शियल चार्ज या टैक्स स्लैब से कोई लेना-देना नहीं है।

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