Non-Bailable : आवेदन BNSS की धारा 75 के तहत दाखिल किया
Kidney Racket Case की सुनवाई 15 जनवरी को
जालंधर। किडनी कांड के हाई-प्रोफाइल मामले STATE OF PUNJAB VS JUNAID AHMED KHAN etc. की 15 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई है। इस में सर्वोदय अस्पताल के डॉ राजेश अग्रवाल और डॉक्टर संजय मित्तल ने पेश होना है। इसमें और भी आरोपियों के नाम हैं। दूसरी तरफ एक अन्य केस में से मिली जानकारी मुताबिक गैर जमानती अपराधों में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत से अरेस्ट वारंट मांगा है।
धोखाधड़ी के इस केस में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने को लेकर दायर इस अहम आवेदन में कहा गया है कि यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 और धारा 79 के तहत दाखिल किया गया है, जिसमें आरोपियों के खिलाफ अदालत से अरेस्ट वारंट मांगा जा सकता है।
Non-Bailable : सर्वोदय अस्पताल को घाटे में दिखाने के संगीन आरोप
मालूम हो दिनांक 23.12.2025 को नवी बारादरी थाना में पुलिस ने एफआईआर नंबर 233 दर्ज की है। इसमें डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर खान और CA संदीप कुमार सिंह निवासी नोएडा के खिलाफ IPC की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 477-A और 120-B लगाई गई है। इन धाराओं के तहत ये Non-Bailable अपराध के आरोपी हैं। इसमें डॉक्टरों पर अपने पार्टनर्स डॉक्टरों से करोड़ों की धोखाधड़ी करने और डॉक्यूमेंट में हेर फेर कर सर्वोदय अस्पताल को घाटे में दिखाने के संगीन आरोप लगे हैं। इसी केस में अरेस्ट बाकी है।
इससे पहले उक्त ठगी वाले मामले में पुलिस यही कहती आ रही थी कि इन्वेस्टीगेशन चल रही है। इसलिए आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकते और बाद में नवी बारादरी थाना के प्रभारी रविंदर ने कहा कि SIT बन गई है। जब उनसे आज SIT में शामिल अफ़सरों की लिस्ट मांगी गई तो उन्होंने कहा ADGP से बात करें।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि एफआईआर में नॉन-बेलेबल धाराएं होने के बावजूद जांच अधिकारी/एसएचओ, थाना नवी बारादरी द्वारा अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई, जिसके चलते न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
मालूम हो कि इस शिकायत में पुलिस कमिश्नर और SHO/IO नवी बारादरी थाने को भी पार्टी बनाया गया है।
शिकायतकर्ता के वकील के अनुसार आवेदन में BNSS की धारा 75 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि “मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट किसी भी ऐसे व्यक्ति को वारंट जारी करने का निर्देश दे सकता है, जो Non-Bailable अपराध का आरोपी हो और गिरफ्तारी से बच रहा हो।” वहीं धारा 79 के तहत यह भी प्रावधान है कि गिरफ्तारी वारंट भारत के किसी भी हिस्से में जारी किया जा सकता है।





