Breaking – धमकाने, गवाही से रोकने के आरोप
जालंधर, 1 जून। जालंधर की अदालत ने पत्रकार नीरज जिंदल को कथित रूप से धमकाने, गवाही देने से रोकने और जान से मारने की धमकियां देने के मामले में बड़ा आदेश जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-5, जालंधर ने थाना रामा मंडी पुलिस को प्रिंस लाहौरिया उर्फ सरबजीत सिंह और मीता लाहौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत में दायर याचिका में नीरज जिंदल ने आरोप लगाया कि वह समाजहित से जुड़े मुद्दों, विशेषकर नशा तस्करी और गैंगस्टर गतिविधियों के खिलाफ समाचार प्रकाशित करते हैं। इसी कारण उन्हें कई बार हमलों, पत्थरबाजी और जान से मारने की धमकियों का सामना करना पड़ा।
Breaking – ऐसा भी कहा जाता है के आरोपियों के सर ऊपर कई लोकल नेताओं का की भी हाथ है है और कई मामलों को लेकर काफी एकसाथ उठना बैठना है।
याचिका में यह भी कहा गया कि पत्रकार पहले से दर्ज कई आपराधिक मामलों में गवाह हैं और आरोपित पक्ष उन्हें अदालत में गवाही देने से रोकने का प्रयास कर रहा है। शिकायत के अनुसार अदालत में पेशी के दौरान उनका पीछा किया गया, उनके कार्यालय पर पत्थरबाजी की गई तथा मोबाइल फोन छीनने की कोशिश भी की गई।
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों और शिकायतों का अध्ययन करने के बाद माना कि यदि किसी व्यक्ति को उसकी गवाही प्रभावित करने, झूठा बयान देने या गवाह के रूप में पेश न होने के लिए धमकाया जाता है, तो यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 232 के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती माना गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपों में अपराध बनता है। इसलिए थाना रामा मंडी के एसएचओ को निर्देशित किया गया है कि प्रिंस लाहौरिया उर्फ सरबजीत सिंह और मीता लाहौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से कार्य करने के अधिकार को लेकर लगातार चिंताएं जताई जा रही हैं। अदालत का यह फैसला गवाहों और पत्रकारों को डराने-धमकाने के मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश माना जा रहा है।
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