CBI – मामला पंजाब के स्टेट टैक्स अधिकारी की शिकायत के आधार पर दर्ज
सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों से जुड़े ₹20 लाख के रिश्वत मामले में तीन लोगों की गिरफ़्तारी की आधिकारिक पुष्टि की है। इनमें दो कथित बिचौलिए और एक सहयोगी शामिल हैं। पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ विजिलेंस के रीडर ओ.पी. राणा फ़िलहाल फ़रार हैं।
CBI के अनुसार, यह मामला पंजाब के एक स्टेट टैक्स अधिकारी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। अधिकारी ने आरोप लगाया था कि विकास उर्फ़ विक्की गोयल और उनके बेटे राघव गोयल ने डायरेक्टर जनरल (विजिलेंस), पंजाब के दफ़्तर में उनके ख़िलाफ़ लंबित एक विजिलेंस शिकायत को बंद करवाने के लिए ₹20 लाख की माँग की थी।
एजेंसी ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर ओ.पी. राणा सहित विजिलेंस के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बिचौलिए के तौर पर काम कर रहे थे। शिकायतकर्ता को कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया गया था कि रिश्वत की रक़म देने पर उनके ख़िलाफ़ शिकायत का निपटारा कर दिया जाएगा।
जाँच-पड़ताल के दौरान, CBI को आरोपों की पुष्टि करने वाले शुरुआती सबूत मिले। जाँच अधिकारियों ने बताया कि बाद में आरोपियों ने अपनी माँग ₹20 लाख से घटाकर ₹13 लाख कर दी थी, साथ ही एक Samsung Galaxy Z Fold7 मोबाइल फ़ोन की भी माँग की थी, जो कथित तौर पर ओ.पी. राणा के लिए था।
CBI – ₹13 लाख नक़द और मोबाइल फ़ोन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा
11 मई को चंडीगढ़ में चलाए गए एक जाल बिछाने के अभियान (trap operation) के दौरान, आरोपी अंकित वधवा को कथित तौर पर शिकायतकर्ता से ₹13 लाख नक़द और मोबाइल फ़ोन लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह रक़म और फ़ोन, दोनों ही CBI ने ज़ब्त कर लिए।
एजेंसी ने आगे बताया कि राघव गोयल, विकास गोयल और ओ.पी. राणा ने कथित तौर पर घटनास्थल के पास मौजूद बंदूकधारियों से सूचना मिलने के बाद फ़रार होने की कोशिश की। पीछा करने के बाद, CBI ने पंजाब-हरियाणा सीमा के पास अंबाला में राघव गोयल, विकास गोयल और दो बंदूकधारियों को धर दबोचा। हालाँकि, ओ.पी. राणा अभी भी फ़रार हैं, और उनकी तलाश तथा गिरफ़्तारी के प्रयास जारी हैं।
मलोट और चंडीगढ़ में आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान, कथित तौर पर ₹9 लाख नक़द और कई अहम दस्तावेज़ बरामद हुए हैं।
जाँच में यह भी सामने आया है कि ओ.पी. राणा और निजी आरोपियों के बीच विजिलेंस से जुड़े लंबित मामलों के बारे में संवेदनशील जानकारी का कथित तौर पर आदान-प्रदान होता था। CBI ने बताया कि वह एक बड़ी साज़िश की जाँच कर रही है, जिसमें अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता और रिश्वत के एक कथित अवैध नेटवर्क की भूमिका भी शामिल है। निजी आरोपियों को सुरक्षा के लिए दिए गए पंजाब पुलिस के उन गनमैनों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके पास कथित तौर पर AK-47 राइफलें थीं।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को चंडीगढ़ की एक विशेष अदालत में पेश किया जा रहा है। आगे की जांच जारी है।
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