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Telescope Times > Blog > Crime & Law > Jalandhar Corporation में ठेकों को लेकर उठे सवाल, कर्मचारियों-अफसरों के परिवारों को दे रखे कॉन्ट्रैक्ट !
Jalandhar Corporation में ठेकों को लेकर उठे सवाल, कर्मचारियों-अफसरों के परिवारों को दे रखे कॉन्ट्रैक्ट !
Crime & Law

Jalandhar Corporation में ठेकों को लेकर उठे सवाल, कर्मचारियों-अफसरों के परिवारों को दे रखे कॉन्ट्रैक्ट !

The Telescope Times
Last updated: October 8, 2026 11:01 pm
The Telescope Times Published October 8, 2026
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Jalandhar Corporation में ठेकों को लेकर उठे सवाल, कर्मचारियों-अफसरों के परिवारों को दे रखे कॉन्ट्रैक्ट !
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कचरा उठाने से लेकर सफाई व्यवस्था तक ठेकों की मेयर और कमिश्नर से जांच की मांग

जालंधर। Jalandhar Corporation/नगर निगम जालंधर एक बार फिर ठेकों, सफाई व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर में आम लोगों के बीच यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि निगम से जुड़े कई काम बिना अतिरिक्त भुगतान के आसानी से नहीं होते। वहीं, अब निगम के ठेकों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े लोगों को ही अलग-अलग काम तो नहीं मिल रहे।

Contents
कचरा उठाने से लेकर सफाई व्यवस्था तक ठेकों की मेयर और कमिश्नर से जांच की मांगकहीं मेयर और कमिश्नर की शह पर तो नहीं ? जाँच ज़रूरी

आरोप लगाए जा रहे हैं कि सफाई, कूड़ा उठाने और ट्रॉलियों समेत कई कामों के ठेके ऐसे लोगों के पास हैं जिनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध निगम के कर्मचारियों अथवा अधिकारियों से बताया जाता है। यदि ऐसा है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है कि टेंडर प्रक्रिया में सभी पात्र ठेकेदारों को समान अवसर मिला या नहीं और कहीं हितों का टकराव तो नहीं हुआ।

बिल्डिंग विभाग को लेकर भी शिकायतें

निगम के बिल्डिंग विभाग को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप हैं कि निर्माणाधीन मकानों, कॉलोनियों और नक्शे से संबंधित गतिविधियों की जानकारी पहले ही बाहर पहुंच जाती है और बाद में संबंधित लोगों पर कार्रवाई के नाम पर दबाव बनाया जाता है।

हालांकि ऐसे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। निगम प्रशासन को चाहिए कि शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर यह स्पष्ट करे कि संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका क्या रही।

कूड़ा उठाने के ठेके पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

कचरा प्रबंधन को लेकर निगम की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों में रही है। मार्च 2026 में मेयर विनीत धीर ने वेस्ट डिस्पोजल ऑपरेशन से जुड़े एक ठेकेदार सतपाल के काम की जांच के दौरान निर्माण मलबे को सामान्य कचरे के साथ मिलाकर उठाए जाने की बात सामने आने पर कार्रवाई की थी।

अब सवाल यह है कि अगर किसी ठेकेदार के काम को लेकर शिकायत सामने आती है या उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, तो उसी ठेकेदार को बाद में दोबारा काम मिलने की प्रक्रिया क्या है? क्या उसके पिछले रिकॉर्ड की जांच होती है? क्या निगम की टेंडर कमेटी शिकायतों और पूर्व कार्रवाई को ध्यान में रखती है?

जनता के टैक्स के पैसे का सवाल

निगम के ठेके सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे से जुड़े होते हैं। इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक टेंडर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, काम की वास्तविकता की जांच हो और भुगतान से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि ठेकेदार ने निर्धारित शर्तों के अनुसार काम किया है।

निगम में ठेकों को लेकर पहले भी आरोप और विवाद सामने आते रहे हैं। 2025 में जालंधर निगम में कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों-ठेकेदारों के संभावित गठजोड़ की जांच की मांग से संबंधित मुद्दों की रिपोर्ट कई अख़बारों में छपी थी।

ऐसे में अब निगाहें मेयर विनीत धीर और निगम कमिश्नर पर हैं। सवाल यह है कि क्या निगम प्रशासन सभी ठेकों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करवाकर यह जांच करवाएगा कि किसी कर्मचारी, अधिकारी या उनके करीबी रिश्तेदार को सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से निगम का ठेका तो नहीं मिला? साथ ही, जिन ठेकेदारों के खिलाफ पहले शिकायतें या कार्रवाई हो चुकी है, उन्हें दोबारा काम देने से पहले उनके रिकॉर्ड की समीक्षा क्यों नहीं की जाती?

अगर निगम प्रशासन इन सवालों पर पारदर्शी जांच करवाता है तो न केवल जनता का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि निगम की कार्यप्रणाली पर लग रहे आरोपों की वास्तविकता भी सामने आ सकेगी।

कहीं मेयर और कमिश्नर की शह पर तो नहीं ? जाँच ज़रूरी

नगर निगम के ठेकों को लेकर कर्मचारियों ने ही बताया, नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि निगम का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर निगम से किसी भी प्रकार का ठेका नहीं ले सकता।

अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी के परिवार के नाम पर ठेका जारी हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। संबंधित ठेके को मंजूरी किसने दी? क्या टेंडर जारी करने से पहले संबंधित व्यक्ति और उसके परिवार का रिकॉर्ड जांचा गया था? क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी थी?

ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी अब निगम के शीर्ष अधिकारियों पर आती है। मेयर विनीत धीर और निगम कमिश्नर को चाहिए कि वे ऐसे सभी ठेकों का रिकॉर्ड निकलवाएं और जांच के बाद कैंसल करें।

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