PRINCIPAL ARRESTED UNDER POCSO: पंजाब के होशियारपुर ज़िले में एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल को अपने ही स्कूल की 11 साल की छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि यह घटना 11 अगस्त को हुई थी और इसकी औपचारिक शिकायत दो हफ़्ते से ज़्यादा समय बाद, 27 अगस्त को दर्ज कराई गई थी।
इस मामले ने शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। आरोपी पर POCSO एक्ट और अन्य कानूनों के तहत चार्ज लगाए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 27 अगस्त को मिली लिखित शिकायत के बाद माहिलपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। घटना 11 अगस्त को अर्ण्याला शाहपुर इलाके में श्मशान घाट के पास हुई थी।
आरोपी की पहचान अनुज वासुदेवा के तौर पर हुई है, जो अर्ण्याला शाहपुर के एक सरकारी स्कूल में हेडमास्टर है और होशियारपुर का रहने वाला है।
आरोप है कि प्रिंसिपल नाबालिग लड़की को अपनी कार में दोपहर करीब 1:30 बजे से 2:30 बजे के बीच श्मशान घाट के पास एक इलाके में ले गया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि यौन उत्पीड़न करने से पहले उसने लड़की को सफ़ेद रंग की नशीली गोली दी थी। यह भी आरोप है कि घटना के दौरान बच्ची को चोटें आईं।
शिकायत में एक बेहद परेशान करने वाला आरोप यह है कि उत्पीड़न के बाद जब लड़की के प्राइवेट पार्ट्स से खून बहना जारी रहा, तो घायल हिस्से पर रुई रखी गई और टेप से चिपका दिया गया। पुलिस ने कहा कि ये आरोप शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी जांच और न्यायिक समीक्षा की जाएगी।
पुलिस ने मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2), बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 6 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376AB के तहत कार्रवाई की है।
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ़्तार किया गया और बाद में अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। नाबालिग का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहाँ उसकी हालत अस्थिर बताई जा रही है।
इस मामले पर होशियारपुर ज़िला बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी सवाल उठाए हैं।
वकील पीएस घुम्मन और शमशेर सिंह भारद्वाज ने उन हालात पर सवाल उठाए जिनमें पुलिस अधिकारी बिना किसी महिला कर्मी के बच्ची का बयान दर्ज करने पहुँचे थे। अस्पताल में मामले को संभालने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि, अस्पताल के कर्मचारियों का कहना था कि उनकी ड्यूटी की शिफ्ट बदल गई थी और उन्हें हालात के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो सख्त कार्रवाई की जाए, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है। इस घटना ने स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता के मन में फिर से चिंता पैदा कर दी है।
अब पुलिस की जांच मुख्य रूप से पीड़ित के बयान, मेडिकल सबूत, फोरेंसिक सामग्री और कथित अपराध से जुड़ी अन्य परिस्थितियों पर केंद्रित होगी। आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना बचाव करने का मौका मिलेगा, जबकि आरोपों की सच्चाई अंततः अदालत में परखी जाएगी।
क़ानूनी जानकारों का कहना है, अगर दोष सिद्ध हुए तो प्रिंसिपल को कम से कम 20 साल की सजा होगी और ज्यादा में उम्र कैद हो सकती है।





