लंदन। PUNJABI DEPORT: यूके की जेल में बंद पंजाबी महिला को डिपोर्ट किया जायेगा। इंग्लैंड की जेलों में भीड़ होने के कारण भी ऐसा किया जा रहा है। हालाँकि मर्डर करने वाला उसका बेटा वहीँ जेल में रहेगा।
जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पूर्व इंग्लैंड में अपने बेटे द्वारा एक व्यक्ति की चाकू घोंपकर हत्या किए जाने के बाद उसकी मदद करने वाली यूके की जेल में बंद भारतीय नागरिक किरण कौर को भारत वापस भेजा (डिपोर्ट किया) जा सकता है। ब्रिटिश अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
53 वर्षीय किरण कौर को जुलाई में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने बेटे, विक्रम दिगवा, की मदद की थी। दिगवा ने पिछले साल साउथेम्प्टन में हेनरी नोवाक की हत्या कर दी थी, और कौर ने उस हथियार को वहां से हटा दिया था जिसका इस्तेमाल हत्या के लिए किया गया था।
दिगवा इस हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। वहीं, उम्मीद है कि ब्रिटेन की जेलों में कैदियों की भारी भीड़ को कम करने के लिए चलाई जा रही एक सरकारी योजना के तहत कौर को समय से पहले रिहा किया जा सकता है।
होम ऑफिस ने किसी विशेष मामले का जिक्र किए बिना कहा, “हम हमेशा यही कोशिश करेंगे कि विदेशी अपराधियों को मौका मिलते ही उनके देश वापस भेज दिया जाए।”
उन्होंने कहा, “हमारी संवेदनाएं हेनरी नोवाक के परिवार और दोस्तों के साथ हैं, जिनकी जान एक भयानक हिंसा की घटना में बेरहमी से ले ली गई।”
आमतौर पर, जिन विदेशी नागरिकों को 12 महीने या उससे अधिक की जेल होती है, उन्हें वापस उनके देश भेजने (डिपोर्ट करने) पर विचार किया जाता है। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं और ऐसे फैसलों के खिलाफ अपील की जा सकती है।
कौर ने अपनी मूल सजा के खिलाफ पहले ही अपील दायर कर दी है, और इस मामले में 5 नवंबर को यूके कोर्ट ऑफ अपील में सुनवाई होनी है।
उनके बेटे ने भी कानूनी चुनौती दी थी और उसे अपनी आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ अपील करने की अनुमति मिल गई है; उसकी सुनवाई भी अगले महीने उसी तारीख को तय की गई है।
दिगवा ने पिछले साल 3 दिसंबर को 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी।
जून में, 23 वर्षीय दिगवा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसमें उसे पैरोल के योग्य होने से पहले कम से कम 21 साल जेल में बिताने होंगे।
इस मामले ने काफी हंगामा खड़ा कर दिया था, क्योंकि आरोपी ने खुद के बचाव में धार्मिक तर्क दिया था। उसने दावा किया था कि इस्तेमाल किया गया हथियार एक ‘कृपाण’ था जिसे सिखों को यूके में साथ रखने की कानूनी छूट है।
जस्टिस विलियम मौस्ली ने, हमले में मदद करने के लिए आरोपी की मां को सजा सुनाते हुए कहा, “सिख धर्म का एक मूल सिद्धांत यह है कि कृपाण को धार्मिक आस्था के प्रतीक के रूप में पहना जाता है, न कि कभी किसी पर हमला करने के उद्देश्य से।” “यह स्पष्ट है कि इसका उचित इस्तेमाल केवल तभी हो सकता है, जब कोई गंभीर खतरा हो और तुरंत कार्रवाई की जरूरत हो। आप इस बात को अच्छी तरह जानती थीं।
“एक जिम्मेदार माता-पिता अपने बेटे से उसके कामों के बारे में सवाल करते और उसे सही काम करने के लिए कहते। लेकिन इसके बजाय, आप चाकू को घर ले गईं और उसे अपने बेटे के बेडरूम में रखे पारंपरिक और अन्य हथियारों के संग्रह के साथ रख दिया,” उन्होंने कहा।
जज ने बताया कि भारत में कौर का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा लेकिन लगभग 30 साल पहले शादी के बाद जब वह UK आईं, तो उनके हालात बेहतर हो गए।
“आपने जो किया, वह किसी निजी फायदे के लिए नहीं, बल्कि गलती से अपने बेटे को बचाने के लिए किया था। इस बात की बहुत कम संभावना है कि आप भविष्य में फिर से ऐसा कोई अपराध करेंगी,” उन्होंने कहा।
नस्लवाद के आरोप झूठे निकले
इस साल की शुरुआत में जब अदालत में अपराध की जानकारी सामने आई, तो ब्रिटिश सिख समूहों और सांसदों ने कृपाण के गलत चित्रण की निंदा की। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में कोई धार्मिक सुरक्षा या उचित कारण लागू नहीं होता है।
इस घटना की वजह से साउथेम्प्टन, हैम्पशायर और आइल ऑफ वाइट में समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया।
पुलिस अधिकारियों पर दोहरे स्तर” (two-tier) की पुलिसिंग के आरोप लगे हैं यानी एक समुदाय को दूसरे समुदाय से ज्यादा प्राथमिकता देना। इस मामले में अब ‘इंडिपेंडेंट ऑफिस फॉर पुलिस कंडक्ट’ (IOPC) जांच कर रहा है।
यह मामला पुलिस के बॉडी-वर्न कैमरे (शरीर पर लगे कैमरे) की फुटेज से जुड़ा है, जिसमें पीड़ित के आखिरी पल कैद हुए थे। फुटेज में दिख रहा है कि पुलिस अधिकारी उसे हथकड़ी लगा रहे हैं। यह कार्रवाई डिगवा के नस्लवाद के आरोपों पर की गई थी, जो बाद में अदालत में झूठे साबित हुए।





